Posts

Artist sourav pramanik BIOGRAPHY

Image
artsourav.blogspot.com Sourav Pramanik is a distinguished contemporary artist hailing from the Seraikela-Kharsawan district (Chandil block) of Jharkhand. Possessing a deep-seated passion for art since childhood, Sourav initiated his artistic journey with a 'Diploma in Fine Arts' from Rabindra Bhavan. Currently, he is in the final year of his Bachelor of Fine Arts (BFA) degree at Srinath University. Rejecting the notion that art is confined to physical mediums, brushes, or canvases, he perceives it fundamentally as a 'pure human capability.'Sourav’s artistic vision is anchored in the concept of **'Micro-truth.'** While the world often perceives only ephemeral physical forms, Sourav resurrects the invisible, pulsating, and vital essence hidden within them onto his canvas. A defining characteristic of his visual language is the unique application of high-contrast chiaroscuro (the intense interplay of light and shadow), which he employs specifically to evoke the in...

OWN PATH PAINTING BY SOURAV PRAMANIK INDIA

Image
  Own path painting  Artist  Statement ​ शीर्षक: अपनी राह – दृश्य से दृष्टि तक का अन्वेषण ​एक कलाकार के रूप में मेरी सृजन प्रक्रिया केवल बाह्य जगत का अनुकरण नहीं, बल्कि अस्तित्व की उन परतों को उघाड़ने की एक निरंतर कोशिश है जिन्हें हम अक्सर सामाजिक शोर में अनदेखा कर देते हैं। मेरी कला 'अचेतन आध्यात्मिक रूपवाद' (Subconscious Spiritual Formalism) की एक अभिव्यक्ति है, जहाँ मैं पदार्थ (Matter) से परे जाकर उसकी ऊर्जा और 'कंपन' (Vibration) को कैनवास पर उतारने का प्रयास करता हूँ। ​मेरी वर्तमान शृंखला, जिसका आधार चींटियों का सूक्ष्म संसार है, आधुनिक समाज के एक गहरे विरोधाभास को चित्रित करती है। चींटियों की वह कतार जिसे मैं अपने परिवेश में देखता हूँ, मेरे लिए उस 'तंत्र' (System) का रूपक है जहाँ 'अनुसरण' करना ही सुरक्षा का पर्याय मान लिया गया है। इस कतारबद्ध व्यवस्था में व्यक्ति अपनी मौलिकता खोकर एक मशीनी इकाई मात्र बन जाता है। मेरी दृष्टि उस कतार से हटकर उस 'अग्रणी' (Leader) को ढूंढती है, जो अपनी पहचान बचाने के लिए कतार से बाहर निकलने का साहस करता है। ...

RASTRA MATA PAINTING by Sourav pramanik Jharkhand

Image
  🇮🇳 राष्ट्र माता: एक अदृश्य रूप और निस्वार्थ सेवा एक कलाकार के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार तब होता है, जब उसकी कला सिर्फ दीवारों पर टंगी न रहे, बल्कि लोगों के हृदय को छू जाए। यह कहानी है 'राष्ट्र माता' नामक उस पेंटिंग की, जिसे बनाने वाले सौरभ प्रामाणिक ने सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि राष्ट्र की भावना का इस्तेमाल किया था। Rastra Mata Painting by artist sourav pramanik  पेंटिंग ऑटो से घर लेकर जाने के समय  🎨 विश्वविद्यालय से घर तक का सफर विश्वविद्यालय के स्टूडियो से निकलकर, सौरभ प्रामाणिक  अपने हाथ में लिपटी हुई अपनी नवीनतम कृति को बड़े स्नेह से पकड़े हुए था। यह पेंटिंग सिर्फ एक कैनवास नहीं थी; यह 'राष्ट्र माता' का एक ऐसा रूप था जिसे उसने अपने चिंतन से जन्म दिया था। घर जाने के लिए उसने एक ऑटो लिया। ऑटो चालक, एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति, जिसने जीवन की धूप-छाँव खूब देखी थी, ने पीछे मुड़कर पूछा, "बाबू, ये क्या है हाथ में? लगता है कोई तस्वीर है?" सौरभ ने बड़े गर्व से जवाब दिया, "जी भैया, यह मेरी पेंटिंग है, नाम है 'राष्ट्र माता'।" चालक ने कौतूहल से पेंटिं...

विकाश कुमार गुप्ता: हर ज़रूरत मंद का सहारा,झारखंड का वो बेटा जो बन गया 'मसीहा'

Image
  झारखंड के बेरमो की गलियों में, एक नाम हर किसी की जुबान पर है - विकास कुमार गुप्ता । वह कोई राजनेता नहीं है, न ही कोई बड़ा अधिकारी।  वह तो बस एक साधारण इंसान है, जिसके दिल में लोगों के लिए बेपनाह प्यार है। जब कोरोना की लहर ने देश को अपनी चपेट में लिया, तो विकास के लिए यह आपदा नहीं, बल्कि एक चुनौती थी। उसने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, ताकि उसके गांव का कोई भी इंसान भूखा न सोए। वह दिन-रात एक करके राशन के पैकेट, दवाइयां और मास्क घर-घर पहुँचाता था। लोग उसे देखकर खुश हो जाते थे और उसकी दुआएं ही विकास की सबसे बड़ी कमाई थीं। विकास का असली हुनर लोगों की आवाज को सही जगह पहुँचाने में था। उसके पास एक स्मार्टफोन था और वह उसका इस्तेमाल समाज की भलाई के लिए करता था। ट्विटर पर उसने एक अकाउंट बनाया और वहीं से उसकी नई पहचान की शुरुआत हुई। लोग उसे अपनी समस्याएं बताते थे, और वह उन्हें ट्वीट करके अधिकारियों तक पहुँचाता था। जल्द ही, वह 'ट्विटर एक्टिविस्ट' के नाम से जाना जाने लगा। एक दिन, उसकी नजर एक छोटे से बच्चे पर पड़ी, जिसके दिल में छेद था। बच्चे के माता-पिता के पास इलाज के लिए पैसे नहीं थे। विकास ने...

गोरांग दत्त: हारती हुई जिंदगियों को बचाने वाला योद्धा

Image
  "जब उम्मीदें टूटती हैं और रास्ते बंद हो जाते हैं, तब कुछ लोग फरिश्ता बनकर सामने आते हैं। यह कहानी है गोरांग दत्त की, जिन्होंने अपनी दया और लगन से कई जिंदगियों को नया जीवन दिया।" गोरांग दत्त: हारती हुई जिंदगियों को बचाने वाला योद्धा  सरायकेला खरसावाँ जिले के कुकड़ु प्रखंड में, पंचायत समिति सदस्य गोरांग दत्त ने कोरोना काल में अपने गाँव वालों की पीड़ा देखी। उन्होंने महसूस किया कि सच्ची सेवा का यही समय है। उन्होंने खुद को केवल एक प्रतिनिधि नहीं, बल्कि हर जरूरतमंद का सेवक बना लिया। गोरांग दत्त ने गाँव की हर छोटी-बड़ी समस्या को अपना माना और उनका समाधान करने में जुट गए। उनका सबसे बड़ा मिशन गरीबों को गंभीर बीमारियों, जैसे कैंसर या दिल की बीमारी, में मदद करना था। जब भी कोई परिवार आयुष्मान कार्ड के बावजूद इलाज नहीं करा पाता, गोरांग दत्त व्यक्तिगत रूप से उनकी मदद करते। उनकी निस्वार्थ सेवा सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं थी। बिहार, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल तक उनकी दयालुता की कहानियाँ पहुँचीं। गोरांग दत्त की कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची ताकत पद में नहीं, बल्कि सेवा और compassion में होती है। वह ...

मंटू प्रामाणिक: सम्मान का हकदार, मानवता का सच्चा सेवक

Image
  मंटू प्रामाणिक: सम्मान का हकदार, मानवता का सच्चा सेवक विपरीत परिस्थितियों में आशा का प्रतीक: मंटू प्रामाणिक चांडिल प्रखंड के घोरानेगी में, जहां उनके पूर्वजों का संबंध छोटालापंग से था, मंटू प्रामाणिक का जीवन किसी सामान्य व्यक्ति की तरह शुरू नहीं हुआ था. 11वीं कक्षा तक शिक्षा ग्रहण करने के बाद, गरीबी की भीषण मार ने उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने से रोक दिया. परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी कंधों पर आ गई और जीवन को पटरी पर लाने के लिए उन्होंने पहले सहारा एजेंसी में काम करना शुरू किया. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. इस कार्य के बाद मंटू को नौ साल के लंबे और निराशाजनक बेरोजगारी के दौर से गुजरना पड़ा. यह वह समय था जब जीवन की हर उम्मीद धुंधली पड़ चुकी थी, और अंततः एक छोटी सी कपड़े की दुकान ने उन्हें आर्थिक रूप से थोड़ा सहारा दिया. मगर मंटू प्रामाणिक की कहानी सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं थी. उनके अंदर कुछ बड़ा करने की ज्वाला धधक रही थी. सोशल मीडिया पर गुरुचरण साहू जी के प्रेरणादायक विचारों और कार्यों ने उनके जीवन को एक अप्रत्याशित मोड़ दिया. गुरुचरण जी से मिली प्रेरणा ने उन्हें समाज सेवा ...

Youth Artist untold Story

Image
  जब रंग बने खिलौने: सौरभ की कला के प्रति बचपन का जुनून चैनपुर की शांत गलियों से निकलकर, सौरभ प्रामाणिक नामक एक युवा कलाकार अपनी कूची से सपनों की दुनिया रच रहा है। चांडिल प्रखंड के चैनपुर नामक छोटे से गाँव में जन्मे सौरभ की रंगों से दोस्ती बचपन से ही अटूट रही है। उनके पिता, किरिटि प्रामाणिक, जिन्हें प्यार से बिल्लू कहा जाता है और जो स्वयं एक कुशल चित्रकार हैं, ने अनजाने में ही अपने बेटे के भीतर कला के उस बीज को अंकुरित कर दिया था जो अब एक विशाल वृक्ष बनने की ओर अग्रसर है। बचपन के दिनों में, जब अन्य बच्चे रंगीन खिलौनों की दुनिया में खोए रहते थे, सौरभ के लिए रंग ही उनके सबसे प्रिय साथी थे। प्रकृति के प्रति उनका गहरा आकर्षण उन्हें सहज ही नैसर्गिक दृश्यों की ओर खींच लेता था। वे घंटों पेड़ों की पत्तियों के हरे रंग, नदियों के निर्मल नीलेपन और आकाश के बदलते हुए अनगिनत रंगों को निहारते रहते थे। उनकी युवा आँखें इन दृश्यों को सोख लेती थीं, और उनका मन उन्हें अपनी कल्पना के कैनवास पर उतारने के लिए बेचैन रहता था। प्रकृति उनकी पहली पाठशाला थी, जहाँ उन्होंने रंगों के अनगिनत रूपों और उनके सूक्ष्म...