OWN PATH PAINTING BY SOURAV PRAMANIK INDIA

 Own path painting 


Artist  Statement

शीर्षक: अपनी राह – दृश्य से दृष्टि तक का अन्वेषण

​एक कलाकार के रूप में मेरी सृजन प्रक्रिया केवल बाह्य जगत का अनुकरण नहीं, बल्कि अस्तित्व की उन परतों को उघाड़ने की एक निरंतर कोशिश है जिन्हें हम अक्सर सामाजिक शोर में अनदेखा कर देते हैं। मेरी कला 'अचेतन आध्यात्मिक रूपवाद' (Subconscious Spiritual Formalism) की एक अभिव्यक्ति है, जहाँ मैं पदार्थ (Matter) से परे जाकर उसकी ऊर्जा और 'कंपन' (Vibration) को कैनवास पर उतारने का प्रयास करता हूँ।

​मेरी वर्तमान शृंखला, जिसका आधार चींटियों का सूक्ष्म संसार है, आधुनिक समाज के एक गहरे विरोधाभास को चित्रित करती है। चींटियों की वह कतार जिसे मैं अपने परिवेश में देखता हूँ, मेरे लिए उस 'तंत्र' (System) का रूपक है जहाँ 'अनुसरण' करना ही सुरक्षा का पर्याय मान लिया गया है। इस कतारबद्ध व्यवस्था में व्यक्ति अपनी मौलिकता खोकर एक मशीनी इकाई मात्र बन जाता है। मेरी दृष्टि उस कतार से हटकर उस 'अग्रणी' (Leader) को ढूंढती है, जो अपनी पहचान बचाने के लिए कतार से बाहर निकलने का साहस करता है।

​प्रकृति के प्रति मेरा जुड़ाव किसी स्थापित मास्टर कलाकार की नकल करना नहीं, बल्कि उस 'आदिम ऊर्जा' को स्पर्श करना है जिसने सृष्टि के हर रूप को गढ़ा है—चाहे वह मशरूम की अनियंत्रित वृद्धि हो या मिट्टी का वह ढेर जिसे हम घर कहते हैं। मेरी कलाकृतियों में मौजूद ज्यामितीय आकार (जैसे ट्रायंगल) और सफेद बॉर्डर केवल तकनीकी तत्व नहीं हैं; वे तरक्की के संकेतों और काम की सीमाओं को परिभाषित करने वाले वैचारिक प्रतीक हैं।

​मेरी कला एक निमंत्रण है—भीड़ से अलग होकर खुद को पहचानने का, अपनी जड़ों से जुड़कर अनंत आकाश की ओर बढ़ने का और अंततः अपनी उस 'आंतरिक पुकार' को सुनने का, जो हमें अपनी खुद की राह बनाने के लिए प्रेरित करती है।

— सौरभ प्रामाणिक





















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